सत्य- सनातन धर्म में देवता वास्तव में 33 करोड़ ही हैं, 33 प्रकार के नहीं!

ब्लॉग – श्रीभागवतानंद गुरु (यूनाइटेड हिन्दी) : इन्टरनेट द्वारा आजकल कुछ सनातन धर्म को बदनाम करने के लिए धर्म के ठेकार आर्य समाजियों और अन्य धर्मद्वेषियों के घोर कुतर्क से क्षुब्ध होकर आज हम आपके समक्ष शास्त्रों के आधार पर यह सिद्ध करने जा रहे हैं कि सनातन धर्म में देवता वास्तव में 33 करोड़ ही हैं। 33 प्रकार के नहीं।

प्रतिकात्मक फोटो
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आम तौर पर जो जन यह समझते हैं कि 33 कोटि शब्द में कोटि का अर्थ ‘प्रकार’ है, वे अपनी बात के समर्थन में निम्न बाते करते हैं।

इन्टरनेट पर फैलाया जाने वाला भ्रमपूर्ण कुतर्क 

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उनका कहना है कि सनातन (हिन्दू) धर्म को भ्रमित करने के लिए अक्सर देवी और देवताओं की संख्‍या 33 करोड़ बताई जाती रही है। धर्मग्रंथों में देवताओं की 33 कोटि बताई गई है ( करोड़ ) नहीं! जिस प्रकार एक ही शब्द को अलग अलग स्थान पर प्रयोग करने पर अर्थ भिन्न हो जाता है। उसी प्रकार देवभाषा संस्कृत में कोटि शब्द के दो अर्थ होते हैं। कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता है । लेकिन यहां कोटि का अर्थ  प्रकार है, करोड़ नहीं!

इस बात के समर्थन में वे यह भी कहते हैं कि ग्रंथों को खंगालने के बाद कुल 33 प्रकार के देवी-देवताओं का वर्णन मिलता है ।
जो निम्न प्रकार से हैं:-

12 आदित्य, 8 वसु, 11 रुद्र और इन्द्र व प्रजापति को मिलाकर कुल 33 देवता होते हैं । कुछ विद्वान इन्द्र और प्रजापति की जगह 2 अश्विनी कुमारों को रखते हैं। प्रजापति ही ब्रह्मा हैं।

12 आदित्य:-
1. अंशुमान, 2. अर्यमा, 3. इन्द्र, 4. त्वष्टा, 5. धाता, 6. पर्जन्य, 7. पूषा, 8. भग, 9. मित्र, 10. वरुण, 11. विवस्वान और 12. विष्णु।

8 वसु:- 1. अप, 2. ध्रुव, 3. सोम, 4. धर, 5. अनिल, 6. अनल, 7. प्रत्यूष और 8. प्रभाष।

11 रुद्र :- 1. शम्भु, 2. पिनाकी, 3. गिरीश, 4. स्थाणु, 5. भर्ग, 6. भव, 7. सदाशिव, 8. शिव, 9. हर, 10. शर्व और 11. कपाली।

2 अश्विनी कुमार:- 1. नासत्य और 2. दस्त्र

कुल : 12+8+11+2=33

33 देवी और देवताओं के कुल के अन्य बहुत से देवी-देवता हैं। सभी की संख्या मिलकर भी 33 करोड़ नहीं होती, लाख भी नहीं होती और हजार भी नहीं। और तो और 50 भी नहीं होती जो वर्तमान में इनकी पूजा होती है।

आगे पढ़े – इनके कुतर्क का खंडन 

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